पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक बार फिर भारत को लेकर अपनी जुबान खराब की है। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान कोलकाता तक हमला करने की ताकत रखता है। ये बयान सुनने में जितना डरावना लगता है, हकीकत में उतना ही हास्यास्पद है। जब कोई देश आर्थिक रूप से कंगाल हो और उसके पास अपने लोगों को खिलाने के लिए पैसे न हों, तब ऐसी धमकियां सिर्फ और सिर्फ घरेलू राजनीति चमकाने का एक जरिया होती हैं।
ख्वाजा आसिफ का यह बयान उस समय आया है जब पाकिस्तान के भीतर सियासी उथल-पुथल मची हुई है। वो भारत के खिलाफ नफरत फैलाकर अपनी जनता का ध्यान असली समस्याओं से भटकाना चाहते हैं। महंगाई आसमान छू रही है। बिजली के बिलों ने लोगों की कमर तोड़ दी है। लेकिन रक्षा मंत्री को कोलकाता की फिक्र है। ये पूरी तरह से एक प्रोपेगेंडा है।
ख्वाजा आसिफ के बयान के पीछे की असली कहानी
पाकिस्तान में जब भी सरकारें गिरती हैं या उन पर दबाव बढ़ता है, तो वे भारत कार्ड खेलती हैं। ख्वाजा आसिफ इसी पुरानी रणनीति पर चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके पास ऐसी मिसाइलें हैं जो कोलकाता को निशाना बना सकती हैं। तकनीकी रूप से देखें तो शायद उनके पास कुछ लंबी दूरी की मिसाइलें हों, लेकिन युद्ध सिर्फ कागजों पर नहीं लड़ा जाता।
युद्ध के लिए एक मजबूत अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय समर्थन चाहिए होता है। पाकिस्तान के पास आज दोनों की कमी है। भारत की सैन्य शक्ति पाकिस्तान के मुकाबले कहीं ज्यादा आधुनिक और संतुलित है। भारत का डिफेंस सिस्टम किसी भी इनकमिंग मिसाइल को हवा में ही खत्म करने की क्षमता रखता है। आसिफ जानते हैं कि वे जो कह रहे हैं, उसे हकीकत में बदलने की हिम्मत पाकिस्तान कभी नहीं करेगा।
कोलकाता को ही निशाना क्यों बनाया
ये एक सोची-समझी चाल है। कोलकाता भारत के पूर्वी छोर पर है। इस शहर का नाम लेकर वे ये दिखाना चाहते हैं कि उनकी पहुंच पूरे भारत में है। वे ये संदेश देना चाहते हैं कि दिल्ली ही नहीं, बल्कि भारत का कोना-कोना उनकी जद में है।
असल में ये बात भारत की जनता को डराने के लिए नहीं, बल्कि पाकिस्तान के कट्टरपंथियों को खुश करने के लिए कही गई है। वहां का एक बड़ा तबका आज भी इसी मुगालते में रहता है कि वे भारत को हरा सकते हैं। आसिफ बस उसी आग को हवा दे रहे हैं। ये पूरी तरह से एक मनोवैज्ञानिक खेल है, जिसमें वे खुद ही फंस चुके हैं।
मिसाइल की रेंज और हकीकत का अंतर
पाकिस्तान की शाहीन-3 मिसाइल की मारक क्षमता करीब 2750 किलोमीटर बताई जाती है। अगर इसे पाकिस्तान के पूर्वी हिस्से से दागा जाए, तो ये कोलकाता तक पहुंच सकती है। लेकिन क्या ये इतना आसान है?
- भारत का रडार नेटवर्क: भारत के पास सीमाओं पर इतना घना रडार नेटवर्क है कि कोई भी हरकत तुरंत पकड़ी जाती है।
- S-400 और स्वदेशी डिफेंस सिस्टम: भारत ने रूस से S-400 खरीदा है और खुद का 'अश्विन' और 'पृथ्वी' एयर डिफेंस सिस्टम भी तैनात किया है।
- सेकंड स्ट्राइक क्षमता: पाकिस्तान को ये भूलना नहीं चाहिए कि भारत की 'नो फर्स्ट यूज' पॉलिसी है, लेकिन अगर हमला हुआ, तो भारत का पलटवार पाकिस्तान को नक्शे से मिटा देने की ताकत रखता है।
युद्ध का मतलब सिर्फ हमला करना नहीं होता, उसे झेलना भी होता है। पाकिस्तान की मौजूदा हालत एक हफ्ते का युद्ध झेलने की भी नहीं है।
पाकिस्तान की आंतरिक मजबूरी
पाकिस्तान में सेना और सरकार के बीच हमेशा खींचतान रहती है। ख्वाजा आसिफ जैसे नेता सेना को ये दिखाना चाहते हैं कि वे भारत के प्रति उतने ही सख्त हैं जितनी सेना। उन्हें अपनी देशभक्ति साबित करने के लिए भारत को गाली देनी पड़ती है।
आज पाकिस्तान में आतंकी हमले बढ़ रहे हैं। टीटीपी (TTP) जैसे संगठन उनकी नाक में दम किए हुए हैं। अपने घर को संभालने के बजाय रक्षा मंत्री दूसरे देश के शहर पर हमले की बात कर रहे हैं। ये वैचारिक दिवालियापन नहीं तो और क्या है? भारत अब इन धमकियों को गंभीरता से लेना छोड़ चुका है। भारत का ध्यान अब अपनी जीडीपी बढ़ाने और तकनीक में आगे निकलने पर है।
क्या भारत को इस पर प्रतिक्रिया देनी चाहिए
भारत के विदेश मंत्रालय ने अक्सर ऐसे बयानों को नजरअंदाज किया है। जब आप एक उभरती हुई ग्लोबल पावर होते हैं, तो आप पड़ोस में चिल्ला रहे किसी शख्स की हर बात का जवाब नहीं देते। भारत जानता है कि पाकिस्तान को उसकी अपनी गलतियां ही डुबो रही हैं।
पाकिस्तानी नेताओं को ये समझना होगा कि 1971 और 1999 के बाद दुनिया बदल चुकी है। अब युद्ध सिर्फ बॉर्डर पर नहीं, बल्कि आर्थिक मोर्चे पर जीते जाते हैं। भारत आज दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और पाकिस्तान कर्ज की किस्तों पर टिका है। ऐसी स्थिति में ख्वाजा आसिफ का बयान सिर्फ एक 'पब्लिसिटी स्टंट' बनकर रह जाता है।
आम जनता पर इसका असर
सोशल मीडिया के दौर में ऐसी खबरें आग की तरह फैलती हैं। सीमा के दोनों तरफ लोग उत्तेजित होते हैं। लेकिन समझदार लोग जानते हैं कि ये सिर्फ चुनावी और राजनीतिक स्टंट है। कोलकाता के लोग या भारत का कोई भी नागरिक इन खोखली धमकियों से डरने वाला नहीं है।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री को चाहिए कि वे कोलकाता के बजाय इस्लामाबाद और कराची की बिजली-पानी की समस्या पर ध्यान दें। उनकी मिसाइलें शायद लंबी दूरी तय कर लें, लेकिन उनकी अर्थव्यवस्था रेंग रही है।
अब समय आ गया है कि भारत इन धमकियों को डिप्लोमैटिक स्तर पर उजागर करे और दुनिया को बताए कि पाकिस्तान किस तरह क्षेत्र में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान की परमाणु धमकियां अब पुरानी हो चुकी हैं और दुनिया उन पर भरोसा नहीं करती। भारत को अपनी सुरक्षा तैयारियों को और पुख्ता करना चाहिए, ताकि आसिफ जैसे लोग सिर्फ बयानबाजी तक ही सीमित रहें।
अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए तकनीकी अपग्रेड जारी रखें। पाकिस्तान की इन चालों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बेनकाब करें। अपनी आर्थिक ताकत को इतना बढ़ाएं कि दुश्मन की धमकियां खुद-ब-खुद शोर में दब जाएं।